Monday, June 29, 2009

"पहली बारिश"





आज पहली बारिश ने मदहोश कर दिया,
तपती रूह को तर कर सराबोर कर दिया ,
एक झोंका हौले से छूकर चुनर लहरा गया ,
फिज़ा ने कान से टकरा कर एक मद्धम गीत गा दिया।



एक लट रुखसारों को छूती हुई ...
कान की बाली से उलझ गई,
मौका देख एक बूँद गाल को चूम गई,
बूँद की बेहयाई ....
हया बन आँखों में उतर गई।




नज़र उठा जब आस-पास देखा ..
झूमते पत्ते, इठलाती तितलियाँ ...
इन्द्रधनुषी रंग , नाचते पंछी, लम्बी राहे...
ताक- ताक मुस्कुरा रहें थे ,
हम दीवाने से बरसात के रंग में रंगे जा रहे थे।




मन बांवरा मदहोश हो गया,
इन धडकनों पर इसका जोर हो गया ।


सुन मौसम ! बदल दे मिजाज अपना जल्दी
घबरा रहे हैं हम कि कहीं
" हमहें तुझसे मोहब्बत न हो जाए "





24 comments:

डॉ. मनोज मिश्र said...

पहली बारिश ,बधाई हो .

M Verma said...

मौका देख एक बून्द गाल को चूम गई
-----
हया बन आंखो मे उतर गयी
+++++++++
एहसास की यह रचना मेरे दिल मे उतर गयी
बहुत खूब -- अतिसुन्दर

अनिल कान्त : said...

ये बारिश ...ये रूमानियत .....बहुत अच्छा लगा पढ़कर

Mithilesh dubey said...

बहुत खुब , आपके भाव ने तो मदहोश ही का दिया।

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया रचना . धन्यवाद.

Murari Pareek said...

वाह जी बेहतरीन, उम्दा, शब्द नहीं मिल रहे सच्ची में, बहुत बहुत प्यारी रचना है!!

महेन्द्र मिश्र said...

सचमुच पहली बूंदे पड़ते ही जी उत्साहित हो जाता है और मन भी हिलोरे मरना लगता है . बेहतरीन रचना .

mukesh said...

bahut khoob ! priya ji pahli barish ko apne sahi abhivyakt kiya . maine bhi isi bishay me apni abhivyakti di hai shayd apko pasand aaye .
bebkkof.blogspot.com

सुशील कुमार छौक्कर said...

बारिश की छोटी छोटी बूंदे होती ही ऐसी है। बहुत उम्दा।

संगीता पुरी said...

वाह !! बहुत खूबसूरत रचना !!

रंजना [रंजू भाटिया] said...

सुन्दर पहली बारिश सी भीनी खुशबु लिए हैं यह आपकी रचना

विवेक सिंह said...

रवि रतलामी जी की व्याख्या भी अच्छी है आपने न देखी हो तो देख लें :)

‘नज़र’ said...

बहुत सुन्दर कविता,

धन्यवाद!

SACCHAI said...

bahut accha "eksacchai.blogspot.com " ki team ki aur se aapko badhai ho

vandana said...

wah priya bahut khoob ......
man baavra madhosh ho gaya
dhadkano pe uska jor ho gaya ..
kya baat hai ....bilkul shayar mijaj .
keep it up in new trend

दिगम्बर नासवा said...

bahoot khoob...सुन्दर चित्रों के साथ लगता है आप भी madhosh हैं baarish में............ लाजवाब rachna

मोहन वशिष्‍ठ said...

वाह जी वाह आपको तीन बार बधाई हो
पहली पहली बारिश होने की खुशी में
दूसरी अच्‍छी रचना के लिए और तीसरी हमारे यहां पर भी आज पहली बारिश आखिर हो ही गई

Pyaasa Sajal said...

second para is damn good...honestly its a cut above the rets of the poem...

Sudhir (सुधीर) said...

बडी ही शोख और शरारती सी अभिव्यक्ति....बड़ा रूमानी अंदाज़-ऐ-बयाँ

बूँद की बेहयाई...हया बन आँखों में उतर आई

बहुत खूब .... कई बार पढ़ी आपकी ये रचना...साधू ॥

शोभना चौरे said...

barish ka svagat bhut achha lga .

रश्मि प्रभा... said...

मन मोर हुआ मतवारा..........बारिश और नज़्म के बीच......इसी कविता को इस बार पढिये हिंद-युग्म पर

richa said...

उफ़ !! इस रूमानी मौसम में बूँद की ये बेहयाई... हमें भी रूमानी कर गयी :)

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

रचना बहुत अच्छी लगी....बहुत बहुत बधाई....

mehek said...

behad khubsurat rachana hai