Friday, June 19, 2009

आसमां के आगे एक जहाँ हो तो

(कल्पना ... इंसान के जीवन का अविभाज्य अंग.... कोई माने या माने ...कल्पना करते तो सभी हैं जिसकी उड़ान की कोई सीमा ही नहीं होती। भले ही ये ज़मीनी हकीकत से दूर हो और कुछ लोगो की जिन्दगी में पानी के बुलबुलों से ज्यादा कोई मायने हो इनके ... पर कुछ के लिए तो ये जिंदगी हैं....ख़ुशी हैं , सुकून हैं फिर भला आत्मिक सुख से बड़ी कोई चीज़ हैं क्या संसार में। शुक्रगुजार होना चाहिए हमें विधाता का कि उसने इंसान को ये फितरत बख्शी कि वो कल्पना के संसार में गोता लगाकर सृजन करता हैं.....आनंदित होता हैं और आनंद बांटता हैं......
भले ही आपमें से कुछ लोग मुझसे सहमत हो या हो ........मेरी सोच, मेरी कल्पना पर किसी का बस ही नहीं , खुद मेरा भी नहीं....जो सहमत हैं वो मेरे साथ हो लें .....जी ले एक खुशनुमा जिंदगी ......धरती और गगन के उस पार)



"आसमां के आगे एक जहाँ हो तो"


आसमां के आगे एक जहाँ हो तो,
उस जहाँ में अपना एक आशियाँ हो तो,
मैं कुछ नए, कुछ अलग से ख्वाब देखू तो


आसमां के आगे एक जहाँ हो तो.................


हम हवां पे तैर कर आगे बढ़ें...
नदियाँ का पुल हो...
और हम पुल के नीचे रहें
सूरज की गर्मी में रोटी हम पका लें ,
चंदा की कड़ाही में दाल बना लें


आसमां के आगे एक जहाँ हो तो.....


हाथ बढ़ा कर नदिया में मछली पकड़ ले ,
सीपों की नइयां में हम सइयां से मिल ले
बादलों के बिछोने पे बिस्तर हो अपना ,
फ़रिश्ते मेरे घर का पहरा करे तो।


आसमां के आगे एक जहाँ हो तो.....


चिया गाकर मुझे जगाये ,
फूल हँस मेरा घर महकाए,
अप्सराए मेरा श्रृंगार कर दे,
जुगनू जबरदस्ती मेरी झांझर बने तो


आसमां के आगे एक जहाँ हो तो.....


तारे मेरा घर रोशन कर दे ,
भवरें गुंजन कर मुझे लोरी सुलाए ,
बरखा कि बूंदे मेरी सखिया हो जैसे,
ओंस आकर मेरे गालो पर तिल सजाये तो


आसमां के आगे एक जहाँ हो तो................


मेरी खिलखिलाहट पर सीप मोती उगल दे,
मेरे केशो की लहर से जलजले रुख बदल दे,
मेरी चाल पे ऋतुए बदल जाये तो,
मुस्कराहट के एवज में पैसे मिले तो।


आसमां के आगे एक जहाँ हो तो................


क्यों मिल कर एक ख्वाब उल्टा-पुल्टा देखे,
ला पाए एक नीड़ ख्यालो का धरा पर तो,
पहुँच जायेगे पंख लगा हम वह तो,
कोई सपना सच जैसा ही रहे तो



आसमां के आगे एक जहाँ हो तो............


कस कर आँखों को भींच रखा हैं,
जैसे आईने में अपना अक्स संभाल रखा हैं,
टूटा अगर तो अक्स बिखर जायेगा...
आज सिर्फ मेरा हैं, कल हजारों का बन जायेगा


आसमां के आगे एक जहाँ हो तो....






22 comments:

श्यामल सुमन said...

किया कल्पना आपने अद्भुत वह संसार।
सुख ही सुख की कामना बरसे अमृत धार।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

ओम आर्य said...

awashya ho mai isake liye aamin kahunga kyoki mai bhi chahata hu ki is duniya se pare ek jahan aapake likhe anusaar awashya ho taki kaee janma prakriti ke god me apani ichchha se aadami ruh bankar bitaye......bahut sundar

‘नज़र’ said...

बहुत ख़ूब, ग़ज़ब विशेषण प्रयोग

---
चर्चा । Discuss INDIA

vandana said...

bahut hi khoobsoorat bhav.......kash aisa sapnon ka aashiyan sabka ho.

"अर्श" said...

MAN KE KOMAL BHAVNAAWON KO BAHOT HI KARGARATAA SE AAPNE LIKHE HAI BAHOT HI KHUBSURATI SE APNE KYAHAALATI BHAV KO TARJIH DI HAI AAPNE... BAHOT BAHOT BADHAAYEE AAPKO...

ARSH

Murari Pareek said...

waah kya kalpana hai sapnoo sa sundar sansaar basaa diyaa apne to!!

दिगम्बर नासवा said...

लाजवाब है आपकी कल्पना की उदान............. अध्बुध दौडाया है अपनी कल्पना की शक्ति को.......... लाजवाब लिखा है

Science Bloggers Association said...

अपने मन के भावों को नवीन बिम्बों के सहारे आपने बहुत खूबसूरती से सजाया है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

M VERMA said...

खूबसूरत ज़ज्बात को आईना दिखा दिया आपने तो -
भावो को तो जीना सिखा दिया आपने तो --
बहुत सुन्दर भाव
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

परमजीत बाली said...

आप ने सही लिखा है कल्पना का मोहक संसार से कोई भी अछूता नहीं रह सकता।कभी ना कभी हम सभी उस में गोता जरूर लगाते हैं।
बहुत सुन्दर रचना है।बधाई स्वीकारें।

''ANYONAASTI '' {अन्योनास्ति} said...

बहुत प्यारा सा ख्वाब है ,
आसमां से आगे अपना भी एक जहाँ हो ,
बादलों में घर हों ,इन्द्रधनुष सी डगर हो ,
अपनाही चाँद हो ,अपना ही अफताब हो ,
काश सच तेरा यह ,'गुदगुदाता 'सा ख्वाब हो ||

Navnit Nirav said...

shabdon ka bahut achchhe aur khoobsoorat tarike se prayog kiya hai aapne.bahut achchha laga.

Pyaasa Sajal said...

ab tareef karne ki koshish karoonga to shabd kam padhenge,aapke lekhan ka star bahut oonchaa hai...is baar bhi aapke expressions gazab ke hai,balki shayd aur zyada khoobsoorat hai...

ek nazariya rakhna chahoonga...jab aap ek tarah ki 2-3 kavitaayein likhte ho to ye aapke style ki tarah lagta hai,par jahaan usi tarah 1-2 aur aa jaaye to fir repetitive feel aa jaata hai...agar aapki akhiri kavita ko alag rakh diya jaaye to aap paayengi ki baaki sabme ek khaas pattern hai...mujhe ye style aapka bahut hi zyaada pasand hai,prakriti ko jis tarah se aap dekhti hai wo personal level pe bahut touch karta hai mujhe...ek khaas baat ye bhi hai ki aapki lagbhag har poem mujhe apne kisi na kisi composition ki yaad dila deti hai(not dat I am comparable to u in any way as far as writing standard is concerned)...kehne ka saar bas yehi hai ki haalanki aapka ye style mujhe,aur us tarah maxm logo ko bahut bhaa raha hai,aap shayad isse ek daayre me kaid ho rahee hai...shayad apnee aagamee rachnao me koi naya experiment kare

shayad pichhli kavita ki tarah fir koi prerna talaashni hogi... :)

Manish Kumar said...

काश आपकी कल्पनाएँ सच हो जातीं !

डाकिया बाबू said...

बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति....सुन्दर रचना ...बधाई !!
कभी मेरे ब्लॉग पर भी पधारें !!

Ram Shiv Murti Yadav said...

आपकी अद्भुत सृजनशीलता का कायल हूँ....वाकई आपकी रचना तमाम रंग बिखेरती है...साधुवाद.***
"यदुकुल" पर आपका स्वागत है....

vandana said...

waaaaaw its realy awesom dream ..and sach a good poetry .........very nic priya


chal chal mere dil chal tujhko khuaboo ki sair karate hai ....
armano se saja sapno ka mahel chal tujhe dikhate hai ....

richa said...

wonderful imagination... kya thoughts hain... kaash kuchh sapne sach jaise hi rehte ya phir sach sapnon jaisa :)

Udan Tashtari said...

बहुत प्यारी रचना..बेहतरीन!! बधाई ले लो!!

Science Bloggers Association said...

आज दुबारा आपकी कविता पढी, और फिर टिप्पणी किये बिना रहा न गया। बहुत सुंदर भाव हैं आपके।
बधाई।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

अक्षय-मन said...

ehsason ke sangam se nikle kuch shabd aur un shabdon ne is anmol rachna ko hamesha ke liye amar kar diya....
bahut hi accha likha hai......

rajiv said...

ख्वाहिशें हैं तो सपने हैं, सपने हैं तो मंजिलें हैं, मंजिलें हैं तो आसमां है, आसमां है तो जहां है और जहाँ के आगे फिर एक आसमां , फिर ख्वाहिशें, फिर सपने और सपने अक्सर सच भी होते हैं