
जीवन की आपा-धापी में दौड़ता आदमी,
लक्ष्य पर लक्ष्य साधता आदमी,
सफलता पे सफलता चढ़ता आदमी,
पर्वतों से ऊँचे ख्वाब बनाता आदमी,
आसमाँ में सुराग करने को बेचैन आदमी,
पर ईमान से महरूम आदमी,
दुनिया की भीड़ को चीर कर आगे बढ़ता आदमी,
एक आदमी तो शिकस्त देता दूसरा आदमी,
एहसानों का एहसास करवाता आदमी
पैसो के ढेर पर बैठा आदमी,
सम्मानित आदमी, सफल आदमी,
सबकुछ पाने की चाह में खुद को खोता आदमी,
पर शांति के लिए तरसता आदमी,
किसी ने पूछा ------
क्या पाना चाहते हो?
कहाँ जाना चाहते हो?
ज्यादा पाओगे तो कहा जाओगे?
अल्लाह के द्वार पर इंसान कहलाओगे,
फ़रिश्ता नहीं बन जाओगे..
खुद के लिए जिया आदमी,
खुद को सजाता आदमी,
खुद पर लुटाता आदमी ,
"प्राइवेट आदमी " बिल्कुल प्राइवेट
एक दिन अचानक दिवंगत हो गया,
एक बेटा था, "प्राइवेट"
शोक मनाया 'प्राइवेट'
अंतिम संस्कार की बारी आई,
प्राइवेट बेटे ने पब्लिक बुलाई
पब्लिक से एक सज्जन बाहर आये,
बोले, हम क्विक एंड फास्ट सर्विस प्रोवाइडर हैं,
बस पंद्रह मिनेट में फ्युनेरल हो जायेगा,
और फ्युनेरल सर्टिफिकेट आपको मेल कर दिया जायेगा
बेटा क्विक डिसिजन मेकर था,
डिसीजन लिया, कांट्रेक्ट दिया,
फ्युनेरल प्राइवेट लिमिटेड को फेम मिला,
कुछ लोग जो पके आम थे,
एस.एम.एस. ई-मेल, फैक्स का सहारा लिया,
अग्रिम बुकिंग का निवेदन किया
फ्युनेरल प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड पर एक वाक्य और जुड़ गया,
प्रिवीयस बुकिंग इस अल्सो अवेलेबल,
अल्लाह हैरान था,
होमोसेपियांस के लिया परेशान था,
कुदरती वैज्ञानिक मैनुफ़ैक्चरिंग डेफेक्ट ढूँढ रहे थे,
ज़मीनी आदमी मुस्कुराता रहा .....