घनघोर बारिश हुई बीते दो दिनलेकिन आज सिर्फ फुहारे गिरे
धूप से कहूं थोड़ी नरमी दिखाए
हवा हौले हौले बदन को छू सरक जाए
गुलमोहर बिछा दूं रस्ते पे
बेलों को लहरा दूं थोडा
द्वार रंगोली बनाऊं
रुच-रुच आरती थाल सजाओं
खूब झूमूं, लजाऊँ, गुनगुनाऊ
कर लूं थोडा सा श्रृंगार
स्टोन वाली बिंदी जंचती है मुझ पर
काजल से चमक उठती है आँखे मेरी
वो मेटेलिक कंगन जिसमे लाल,पीले और हरे स्टोन जड़े है
फब्दा मुझ पर,
वार्डरोब खोले खड़ी हूँ
क्या पहनूं
जिसमें, सिंपल, सोबर और गुड लुकिंग लगूं
ये पर्पल कलर वाला अच्छा है
उनकी चोइस जैसा :-)
बस अब बंद करो संदेशे भेजना
शहर में रह कर इतनी दूरी अच्छी नहीं होती
नहीं होता इंतज़ार
जल्दी से आओ ना
ये बातूनी लड़की
बावरी हों चुकी है
तुम्हारी बाट जोहते-जोहते