Monday, July 6, 2009

"आदमी का प्राइवेटाईजेसन"





जीवन की आपा-धापी में दौड़ता आदमी,
लक्ष्य पर लक्ष्य साधता आदमी,
सफलता पे सफलता चढ़ता आदमी,


पर्वतों से ऊँचे ख्वाब बनाता आदमी,
आसमाँ में सुराग करने को बेचैन आदमी,
पर ईमान से महरूम आदमी,


दुनिया की भीड़ को चीर कर आगे बढ़ता आदमी,
एक आदमी तो शिकस्त देता दूसरा आदमी,
एहसानों का एहसास करवाता आदमी


पैसो के ढेर पर बैठा आदमी,
सम्मानित आदमी, सफल आदमी,
सबकुछ पाने की चाह में खुद को खोता आदमी,
पर शांति के लिए तरसता आदमी,


किसी ने पूछा ------
क्या पाना चाहते हो?
कहाँ जाना चाहते हो?
ज्यादा पाओगे तो कहा जाओगे?
अल्लाह के द्वार पर इंसान कहलाओगे,
फ़रिश्ता नहीं बन जाओगे..


खुद के लिए जिया आदमी,
खुद को सजाता आदमी,
खुद पर लुटाता आदमी ,
"प्राइवेट आदमी " बिल्कुल प्राइवेट


एक दिन अचानक दिवंगत हो गया,
एक बेटा था, "प्राइवेट"
शोक मनाया 'प्राइवेट'
अंतिम संस्कार की बारी आई,
प्राइवेट बेटे ने पब्लिक बुलाई


पब्लिक से एक सज्जन बाहर आये,
बोले, हम क्विक एंड फास्ट सर्विस प्रोवाइडर हैं,
बस पंद्रह मिनेट में फ्युनेरल हो जायेगा,
और फ्युनेरल सर्टिफिकेट आपको मेल कर दिया जायेगा


बेटा क्विक डिसिजन मेकर था,
डिसीजन लिया, कांट्रेक्ट दिया,
फ्युनेरल प्राइवेट लिमिटेड को फेम मिला,


कुछ लोग जो पके आम थे,
एस.एम.एस. ई-मेल, फैक्स का सहारा लिया,
अग्रिम बुकिंग का निवेदन किया


फ्युनेरल प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड पर एक वाक्य और जुड़ गया,
प्रिवीयस बुकिंग इस अल्सो अवेलेबल,
अल्लाह हैरान था,
होमोसेपियांस के लिया परेशान था,


कुदरती वैज्ञानिक मैनुफ़ैक्चरिंग डेफेक्ट ढूँढ रहे थे,
ज़मीनी आदमी मुस्कुराता रहा .....



25 comments:

awaz do humko said...

kitne khoobsurat andaaz mein aap ne likha hai vaqai haqeeqat bayan karne ka behtreen andaaz ...badhai

Kapil said...

प्राइवेटाजेशन की बड़ी उत्तर-आधुनिक व्‍याख्‍या है। प्रयोग अच्‍छा है।

M VERMA said...

काश! मैनुफ़ैक्चरिंग डेफेक्ट मिल जाए तो आदमी आदमियत से दूर तो न हो
बहुत अच्छी और प्रभावी रचना

श्रद्धा जैन said...

bahut alag bahut vichaarneey likhti ho

Udan Tashtari said...

:) बढ़िया है.

Harkirat Haqeer said...

प्रिया जी ,

मेरा मोनिटर धीरे धीरे दम तोड़ता जा रहा है ....आँखों पर जोर देने पर भी कुछ पढ़ नहीं पी .....आप लाक न लगती तो शायद पढ़ पाती.....खैर फिर आउंगी दुसरे कंप्यूटर से ....!

हाँ दिलीप जी ने तो कमाल ही कर दिया है सुनियेगा जरुर .....!

JHAROKHA said...

Bahut sundar ...adamee ke aaj ke halat ka sachchaa varnan..
Poonam

अविनाश वाचस्पति said...

असलियत से फिर भी बच रहा है आदमी
आदमी को डस रहा है नित्‍यप्रति आदमी

AlbelaKhatri.com said...

jai ho aapki
bahut hi umda kavita ....

waah waah

creativekona said...

प्रिया जी,
बहुत बढ़िया और सरल शब्दों में आपने आज के आदमी का वर्णन किया है……अच्छी प्रभावशाली कविता……।
हेमन्त कुमार

Murari Pareek said...

वाह बहुत खरी, सोने बरगी बात कहदी बहुत गज़ब !!

Anonymous said...

Really very amazing post.

दिगम्बर नासवा said...

वाह ...क्या खूब लिखा है ............ तेज़ धार है व्यंग की इस रचना में........... शब्दों को खूबसूरती से संजोया है और आज के खोखले आदमी की असलियत को पूर्ण रूप से खोल दिया है

‘नज़र’ said...

अनुपम रचना है

विनोद कुमार पांडेय said...

bahut sundar likha aapne,

aaj ham itana vikas to jaroor kar liye hai par manvata ada karane me sabse piche hai...

ise insaan ka durbhagy hi kaha jay
ki bhagwaan ne kitana badhiya banaya aur jameen par aake ye rup dekhane ko mil raha hai.
dhanywaad achcha likha aapne,,

Dhiraj Shah said...

khusurat rachan

Navnit Nirav said...

ek vyangatmak shaili aur kuch shabad jo naye to nahi kahoonga par videshaj, jo ab aam ho gaye hai.Prayog kaphi achha laga.

Manish Kumar said...

achcha laga is andaaz mein aapka aaj ki aam zindagi ko is kavita mein utarna

SAHITYIKA said...

bahut khoob..
bahut sahi kataksh kiya hai..
lekin last 2 lines kuch samjh nahi aayi..

shuruwat vakai bahut achchi thi.. lekin beech me jaa kar kuch achanak hi badlaw ho gaya..

plz do tell me meaning of last 2 lines..

take care dear

Priya said...

इस कृति को पसंद किया आप सबने. बहुत - बहुत आभार

साहित्यिका आपको अंतिम पंक्तिया का अर्थ बताती हूँ --
Kudrati vaigyanik manufacturing defect dhoodh rahe the
zamini aadmi muskurata raha

Iska matalb ye hain ki

God send human on earth with all mankind virtues as love, kindness,
compassion, emotions, cordiality, endearment ......... & much more but
all these mankind feature removes gradually & we become so called
practical person..... always do trade with relations, thinks about
profit and loss.

In above two lines I tried to emphasize god's view towards his
creation.....He is deeply thinking that wat happened with human being?
Is there any mistake from his side at the time of creation and man on
earth is laughing on god as he is making foolish to his creator.

Hope, you will get my point.

Regards,

Priya

"लोकेन्द्र" said...

कहा से उठाया और कहा पटक दिया................
बहुत खूबसूरती से तमाचा दिया है आपने कुछ विशेष वर्ग पर......

शोभना चौरे said...

बेहद खूबसूरती से आपने आधुनिक समाज
की जिन्दगी को उजागर कर दिया |
आदमीं से कटताजा रहा है आज का आदमी
धन्यवाद |

vishnu-luvingheart said...

Kahi na kahin haqiqat hai isme....
aaj nahi to aane wale waqt ki surat hai isme....

नीरज गोस्वामी said...

सब कुछ पाने की चाह में खुद को खोता आदमी....बहुत सच्ची और अच्छी रचना...गंभीरता से शुरू की गयी रचना को आपने व्यंग का पुट दे कर यादगार बना दिया है....बहित खूब प्रिया जी...बधाई...
नीरज

Dr. shyam gupta said...

बहुत सुन्दर-सम्पूर्ण व्याख्या,गिरता हुआ आदमी,कन्ट्रेक्ट,मशीनी करण,दरकते हुए रिश्ते व अति-भौतिकी करण का। साहित्यिका को दिया उत्तर भी सटीक है। बधाई।