Tuesday, August 23, 2011

बावरी लड़की



घनघोर बारिश हुई बीते दो दिन
लेकिन आज सिर्फ  फुहारे गिरे
धूप से कहूं थोड़ी नरमी दिखाए
हवा हौले हौले बदन को छू सरक जाए


गुलमोहर बिछा  दूं रस्ते पे
बेलों को लहरा दूं थोडा
द्वार रंगोली बनाऊं
रुच-रुच आरती थाल सजाओं
खूब झूमूं, लजाऊँ, गुनगुनाऊ


कर लूं थोडा सा श्रृंगार
स्टोन वाली बिंदी जंचती है मुझ पर
काजल से चमक उठती  है आँखे मेरी
वो मेटेलिक कंगन जिसमे लाल,पीले और हरे स्टोन जड़े है
फब्दा  मुझ पर,
वार्डरोब खोले खड़ी हूँ
क्या पहनूं
जिसमें, सिंपल, सोबर और गुड लुकिंग लगूं
ये पर्पल कलर वाला अच्छा है
उनकी चोइस जैसा :-)


बस अब बंद करो संदेशे भेजना
शहर में रह कर इतनी दूरी अच्छी नहीं होती
नहीं होता इंतज़ार
जल्दी से आओ ना
ये बातूनी लड़की
बावरी हों चुकी है
तुम्हारी बाट जोहते-जोहते

10 comments:

Vandana Singh said...

dekho ji .....hamse jyada jaldi koi nahi karega aane me :P:D ....aage tak aazma lena chahe :P:D ...

vaise nye tevar nye rang dil ko bahut bhaye :)...keep falling in it :)

वन्दना said...

बहुत सुन्दर भाव सजाये हैं।

mridula pradhan said...

bahut achchi lagi......

AlbelaKhatri.com said...

sundar....abhinav rachna !

रचना दीक्षित said...

बातूनी लड़की बाबरी हो चुकी है. अत्यंत संवेदनशील. बहुत सुंदर रचना.

सागर said...

हाय अल्ला ! हम तो मारे शरम के पानी पानी हो गए.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

aafareen......aafareen......aafareen......

Apanatva said...

sunder sahaj saral bhavo kee pyaree abhivykti.

कौशलेन्द्र said...

हूँ.........! तो अब एक बाबरा खोजने का वक्त आ गया है ........लेकिन बातूनी लड़की के लिए एक चुप-चुप रहने वाला बावरा ......सुनने वाला भी तो होना चाहिए न ! दोनों बातूनी होंगे तो झगड़ा होगा ....तो मैं चला .......ढूँढने कोई बावरा ....

kanu..... said...

sundar