Friday, May 28, 2010

याद बिल्कुल नहीं आते मुझे तुम


सोचते होगे के
याद आते हो मुझे तुम
गलत हो तुम
हमेशा की तरह


मैं उनमें से नहीं
के यादों की गठरी
साथ बाँध  टहलू.



गुज़रे को भूल
वर्तमान को जीती हूई
भविष्य का निर्माण
आदत है मेरी.  



कल एक कॉमन फ्रेंड
से मुलाकात हुई
उसके साथ मिल
तुम्हारी बुराई में
पूरा दिन गुज़ारा. 



शब् तक झगड़ पड़ी उससे
तुम्हारी  बुराई में ....
मुझसे ज्यादा पार्टीसिपेट किया उसने.
मुझसे ज्यादा कोई बुरा कहे तुम्हे .....
ये बर्दाश्त नहीं मुझे.



भले ही तुमने ना दिया हो
भले ही मैंने ना लिया हो
" हक"
कुछ कहने- सुनने का.



अब कोई खुशफहमी मत पलना
यहीं
कि तुम मुझे याद आते हो.



इतना तो याद ही होगा
कि एक्सपायरी डेट की दवा
नहीं रखती मैं मेडिकल बॉक्स में.



जैसे मुझे याद हैं -
टेलकम पावडर
डाल -डाल कर तुम्हारा
जुराबे पहनना



सुधरे तो होंगे नहीं तुम
याद बिल्कुल नहीं आते मुझे तुम.


प्रिया  


35 comments:

संजय कुमार चौरसिया said...

kya kahna
bahut khoob

http://sanjaykuamr.blogspot.com/

डॉ.सुभाष भदौरिया. said...

नज़र उसकी ज़बां उसकी तअज्जुब है मगर फिर भी,
ज़बा कुछ और कहती है नज़र कुछ और कहती है.

पर हम क्या करें जो आज तक नहीं भूले,

आपकी अछान्दस रचना के प्रवाह ने अपनी तरफ बरबस खीच लिया बयान ज़ारी रहे भरम रफ्ता रफ़्ता टूट रहे हैं.

माधव said...

अच्छी ग़ज़ल


मेरा ब्लॉग -http://madhavrai.blogspot.com/


पापा का ब्लॉग http://qsba.blogspot.com/

pankaj mishra said...

बहुत खूबसूरत क्या कहने। वाह।

अच्छी लाइन। आपको साधुवाद।

http://udbhavna.blogspot.com/

श्यामल सुमन said...

भबिष्य निर्माण की बात ठीक लगी।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

कविता रावत said...

Bhulani kee koshish mein yaad karne ka andaaj bahut achha laga.... hota hai jindagi mein aisa bhi.....
... never let your post interfere with the flow of present day life....

sanjukranti said...

ispashtvadita ki parakashtha...

vinay vaidya said...

अद्भुत भाव-व्यंजना !
शीर्षक से लेकर अंतिम पंक्ति तक ।
हँस भी सकते हैं,
हैरान भी हो सकते हैं ।
बहुत समय तक याद रहेगी यह ।
बधाई ।

M VERMA said...

परिकल्पना मे पढा था
सुन्दर रचना

सुनील दत्त said...

सुन्दर रचना

vandana said...

maan li ji apki baat bilkul :-)


bahut bahut komal si rachna :)

AlbelaKhatri.com said...

sundar !

sangeeta swarup said...

बहुत भावभीनी सी कविता.....बहुत सुन्दर

shikha varshney said...

wowwwwwwww...simply superb...

Shekhar Kumawat said...

are baba re ye to panga ho gaya jab yad hi nahi aate to aage kya hat kare

Shekhar Kumawat said...

nice

अरुणेश मिश्र said...

प्रिया जी . आपने रचना मे स्वस्थ रहने का सूत्र भी लिख दिया - जो बीत गया भूल जाओ ।
प्रशंसनीय ।

वन्दना said...

yaad karne ka ye andaaz bhi khoob hai........sundar abhivyakti.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

priyaa ji...
tareef karne k liye shabd nahi hain, aap hamesha hee aisa kamaal karti hain ki main stabdh reh jaata hoon..
one of the best ones from your side..
keep writing...
bless you!

Dimps said...

Hello Priya :)

Tareef karo kya iski... jisne inn emotions ko itni achhi tarah se likha :)

Ek english song hai issi subject pe based... by Phil Collins... "I have forgotten everything about you" ... and wo yaad aa gayaa padd ke aapki kavita...

Atti-uttam!

Regards,
Dimple

सागर said...

रुना लैला का एक गीत है... तुम्हें हो ना हो, मुझको तो इतना यकीन है, मुझे प्यार तुमसे नहीं है. नहीं है. सुना है ?

अलीम आज़मी said...

wow priya ji its really fabulos keep going ....

सम्वेदना के स्वर said...

आज आपकी कविता देखकर पहली बार दुष्यंत कुमार को कोट कर रहा हूँ, क्योंकि उनका ये शेर बेसाख़्ता ज़ुबान पर आया हैः
मैं तुझे भूलने की कोशिश में
आज कितने करीब पाता हूँ.

Gourav Agrawal said...

oh my god :)

i have no idea how to express

दिगम्बर नासवा said...

कहना और करना ... सच में इतना आसान नही ...
भावपूर्ण रचना .. बहुत उम्दा ...

sangeeta swarup said...

आपकी यह पोस्ट ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर मंगलवार १.०६.२०१० के लिए ली गयी है ..
http://charchamanch.blogspot.com/

रचना दीक्षित said...

हाँ ये सच है की हमारे जीवन में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो बिलकुल इसी तरह हमें नहीं याद आते हैं सुन्दर भाव बेहतरीन शब्द संयोजन.जीवन के सत्य का एक पहलू. बेहतरीन अभिव्यक्ति

रश्मि प्रभा... said...

yaad aakar bhi nahi yaad aate tum
yaad hai zuraben
per phir bhi main in yaadon se alag hun....
antardwand se gujarta mann

Avinash Chandra said...

kya kahun?

kuchh bahut alag saa padha...bahut hi alag...shayad ise khubsurat kahte hain... :)

Satya.... a vagrant said...

ओह ........ परवीन आपा बेसाख्ता याद आ गयीं. मुझे इम्कान है कि आपने जरुर पढी होगि वो नज्म जिसकी मै बात कर रहा हूं. फिर भी मै चाहुंगा एक बार फिर से पढे.

http://www.shers.in/shayari/dard-bhari-shayari/khwaabon-ka-bharam-toot-gaya-778/

सत्य

dimple said...

जब खुशफहमी मत पालना की बात करती है आप तो लगता है कि-
मेरी नज़र में इक बार ज़ो बुरा हो जाये,
पुजुंगी नहीं चाहे वो खुदा हो जाये.

याद बिलकुल नहीं आते मुझे तुम तो लगता है - उस रोज ये लगता है की बेकार जिए हम,
जिस रोज सनम ज़िक्र तुम्हारा नहीं होता.

जिस ज़मीं पे खड़े हो के भविष्य को देखते है वो यादों की ही ज़मीं होती है.

Jayant Chaudhary said...

Hmmm this one is really deep one.
Where it takes you with each word, it is difficult to guess...
Those last lines are simply killer..

भूतनाथ said...

are..........!!!vaah........!!

भूतनाथ said...

are..........!!!vaah........!!

राजेश चड्ढ़ा said...

यही है कविता ....बदलते दौर की भाषा को नये तेवर और नई उपमा की ज़रुरत है....इसलिए प्रभावशाली कविता को पढ़ कर अच्छा लगा